वार्ता:मुखपृष्ठ

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मानक राय (जन्म 6 जुलाई 2000) को मध्यप्रदेश के छतरपुर जिले के सटई नगर पंचायत में हुआ

चित्र नही दिख रहा[संपादित करें]

फरवरी २०१६ का साँचा बनाया ही नही है, अपितु मुखपृष्ठ पर चित्र नही दिख रहा है।--106.78.219.139 (वार्ता) 14:14, 1 फ़रवरी 2016 (UTC)

@सत्यम् मिश्र, Hindustanilanguage, और संजीव कुमार: जी, ये देखिए। --गौरव सूद (वार्ता) 14:24, 1 फ़रवरी 2016 (UTC)

आलेख और चित्र[संपादित करें]

@संजीव जी, अनिरुद्ध जी, माला जी, सिद्धार्थ जी, हिंदुस्तानवासी जी, अजीत जी, और प्रॉन्स जी: आज का आलेख और निर्वाचित चित्र दिख नही रहे। शायद साँचोंके नामोँमे फिर से कोई समस्या हुई है। Dharmadhyaksha (वार्ता) 04:00, 3 अक्टूबर 2017 (UTC)

@Dharmadhyaksha: जी! पहले तो आपका बहुत बहुत धन्यवाद इस त्रुटि पर ध्यानाकर्षण हेतु, फिर क्षमा चाहूंगा, अक्तूबर नाम से सांचा बना था जबकि यहां अक्टूबर प्रयोग किया गया है। उसे सुधार दिया गया तो दोनों ही, चित्र एवं आलेख मुख्पृष्ठ पर आ गये।आशीष भटनागरवार्ता 15:33, 4 अक्टूबर 2017 (UTC)
चलो अब मुझे पता चल गया हैं तो मैंने ही कर दिया। Dharmadhyaksha (वार्ता) 04:02, 8 नवम्बर 2017 (UTC)

स्वागत सन्देश और बंधू प्रकल्प[संपादित करें]

मैंने लगभग एक महीने पहले, चौपाल पर बंधू प्रकल्प में भारतीय भाषाओं में उर्दू को जोड़ने और स्वागत सन्देश में विकिपीडिया पर आपका स्वागत है! ऐसा लिखने का प्रस्ताव डाला था, उसपर लगभग सबका समर्थन मिल गया, मगर उसे अभी तक कार्यान्वित नहीं किया गया....अब उसे भी कार्यान्वित कर दिया जाय, हालाँकि अंजलि मुद्रा की बात अभी भी अटकी पड़ी है, मगर कमसेकम उक्त दोनों चीज़ों को तो कार्यान्वित किया ही जा सकता है।🙏Natural-moustache Simple Black.svg  निरपराधवत् मृदुरोमकः    वार्ता  20:58, 10 मार्च 2018 (UTC)

@Innocentbunny: उर्दू जोड़ी गई। कृपया जाँच कर बताए कि सब ठीक है (प्रदर्शन, वर्तनी, वगैरह)। बाकी आप किस बारे में बात कर रहे हैं समझ में नहीं आया।--हिंदुस्थान वासी वार्ता 17:44, 30 मार्च 2018 (UTC)

Afrikaanse Wikipedia[संपादित करें]

Please add the Afrikaanse Wikipedia on the list, as it reached 50,000 articles today. The quality of articles seems to be good enough. Best regards, -- SpesBona (वार्ता) 10:00, 15 जून 2018 (UTC)

@SpesBona:  Yes check.svg Done--आर्यावर्त (वार्ता) 13:47, 10 जुलाई 2018 (UTC)

समाचार[संपादित करें]

2019 रग्बी विश्व कप87.140.111.165 (वार्ता) 09:01, 19 सितंबर 2019 (UTC)

गोस्वामी सूरजनंद भारती महाराज[संपादित करें]

सूरजनंद भारती महाराज जी का जन्म 1988 को भारतवर्ष में महाराष्ट्र के वर्धा जिला तलेगांव ग्राम में हुआ। वह दशनामी परंपरा अंतर्गत गोस्वामी जाति में जन्मे। उनके पिता का नाम विजय भारती और मां का नाम मंदा भारती है। उनके दादा का नाम गोस्वामी गणेश जी राम भारती है । वहां तीन बहने और दो भाई थे। ( मीनल भारती, शीतल पुरी, छाया गोस्वामी, और भाई राहुल भारती ) है। उन्होंने 23 वर्ष की आयु में सन्यास ग्रहण कर लिया। 2011 में प्रयागराज कुंभ मेला में जूना अखाड़े में से दीक्षा ग्रहण की। जूना अखाड़े के पीठाधीश्वर आचार्य श्री अवधेशानंद जी गिरी महाराज जीने दीक्षित किया।

     गोस्वामी सूरजनंद जी भारती महाराज ने गोस्वामी हरिहर सेवा आश्रम चैरिटेबल ट्रस्ट की स्थापना की वह अध्यक्ष रूप में आश्रम की सभी व्यवस्था सुचारू रूप से कार्य करवाते हैं।

गोस्वामी सूरजनंदजी भारती महाराज बीए तक पढ़ाई कर चुके हैं उन्होंने अल्पकाल में ही चारों वेद ,18 पुराण , श्रृतिया ,ध्यान साधना ,योग सभी का अध्ययन कर अल्पकाल में ही विद्या ग्रहण कर ली । वर्तमान में गोस्वामी हरिहर सेवाश्रम के माध्यम से जनमानस के लिए बहुत से समाज सुधारक कार्य किए जाते हैं । सुगम संगीतमय कथाऐ कर महाराज जी स्वयं गौर गरीबों को सकारात्मक जीवन जीने के लिए नई दिशा दिखा कर नई ऊर्जा प्रदान करते हैं। गरीबों को और नव जवानों को व्यसन मुक्ति के और बढ़ाते हैं। गोस्वामी सूरजनंद भारती महाराज जी से संपर्क साधने के लिए । गोस्वामी हरिहर सेवा आश्रम चैरिटेबल ट्रस्ट, महाराष्ट्र, वर्धा, आष्टी ,तलेगांव (श्यामजी पंत) ४४२२०२ S v Bharati (वार्ता) 13:02, 2 अक्टूबर 2019 (UTC)

फूलपातड़ी[संपादित करें]

राजस्थान के शेखावाटी अंचल की स्त्रियों द्वारा पहना जाने वाला एक मंगलसूत्र फूलपातड़ी वास्तव में एक प्रकार का मंगलसूत्र है, जो राजस्थान के शेखावाटी अंचल में स्त्रियों द्वारा पहनी जाती है. इसमें चांदी से बनी सात गोल-गोल पातड़ियां अर्थात पत्तियां होती हैं, हालांकि आजकल ये सोने की भी बनने लगी हैं और यह गोलाकार पातड़ी यानि पत्तियां समूह में फूल जैसा आकार लेकर फूलपातड़ी कहलाती हैं, जो बेहद ही ख़ूबसूरत एवं मनमोहक लगती हैं. इसे विवाह के समय वधु के गले में लाल-पीले धागे या मौली में पिरोकर पहनाया जाता है. बाद में काले धागे में भी इन्हें पहना जाता है. फूलपातड़ी एक बहुत ही सिंपल, सादगीपूर्ण, गरिमामय गहना है, जो नवविवाहिताओं से लेकर प्रोढ़ औरतों द्वारा बड़े चाव से पहनी जाती हैं. महत्वपूर्ण बात यह कि जहाँ मंगलसूत्र को केवल सुहागन स्त्रियां ही पहन सकती हैं, वहीं, फूलपातड़ी एक ऐसा गहना है, जिसे विवाहिता से लेकर कुंवारी कन्याएं व विधवा औरतें भी पहनती हैं. यह विवाह परम्परा का सबसे अहम हिस्सा माना जाता है, जो वधु के गले में होना बहुत ही शुभ व आवश्यक समझा जाता है.. इसे झालरा, पातड़ी, पातड़ली आदि नामों से भी जाना जाता है. हालांकि आजकल इसका चलन कम हो गया है, पर नवविवाहिताएं कम से कम सवा महिने गले में ज़रूर रखतीं हैं. शेखावाटी अंचल में फूलपातड़ी पहने हुए आपको हज़ारों मां-बहनें दिख जायेंगी। [सदस्य:Kapil Dev Arya|Kapil Dev Arya]] (वार्ता) 09:08, 13 अक्टूबर 2019 (UTC)